भोपाल/ थाना प्रभारियों की कार्यकुशलता के लिए अनूठा ग्रेडिंग सिस्टम, हर महीने 22 पुलिसिंग पैमानों और 1000 अंकों पर परखी जाएगी थानेदारी, खराब प्रदर्शन और लापरवाही पर होगी माइनस मार्किंग, जा सकती है कुर्सी
अब थानेदारों की कार्यकुशलता केवल अपराध दर्ज करने या शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर महीने उन्हें 1000 अंकों की परीक्षा से गुजरना होगा। लगातार तीन माह तक निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले थाना प्रभारियों को कुर्सी गंवानी पड़ सकती है।
एक थाने का फरार, दूसरी थाना पुलिस ने पकड़ा तो मिलेंगे बोनस मार्क्स
ग्रेडिंग सिस्टम में कुल 22 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें आर्म्स एक्ट के प्रकरण, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, स्थायी और गिरफ्तारी वारंट की तामिली, फरार आरोपितों की गिरफ्तारी, निगरानीशुदा बदमाशों पर कार्रवाई, जिलाबदर अपराधियों की मॉनिटरिंग, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, गंभीर अपराधों की विवेचना और अपराध नियंत्रण जैसे विषय प्रमुख हैं।
हर विषय के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं। कुछ श्रेणियों में 50 अंक तो कुछ में 20 या उससे अधिक अंक दिए जाएंगे। महीने के अंत में सभी बिंदुओं के आधार पर थाना प्रभारी का कुल स्कोर तैयार होगा।
इस परीक्षा की सबसे खास बात यह है कि केवल अच्छे कार्यों पर अंक नहीं मिलेंगे, बल्कि लापरवाही और कमजोर प्रदर्शन पर अंक काटे भी जाएंगे। यदि किसी थाने में जिलाबदर बदमाश की निगरानी में कमी पाई गई, गंभीर अपराधों में वृद्धि हुई, लंबित वारंटों की संख्या बढ़ी या किसी फरार आरोपित को दूसरे थाना क्षेत्र की पुलिस ने पकड़ लिया, तो संबंधित थाना प्रभारी के अंक कम किए जाएंगे। वहीं दूसरी थाना पुलिस को बोनस अंक मिलेंगे।
संगीन अपराधों में आरोपितों की जमानत का प्रभावी विरोध करने, फरार अपराधियों को गिरफ्तार करने और विशेष अभियानों में बेहतर प्रदर्शन करने पर अतिरिक्त अंक मिलेंगे।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने हाल ही में कमिश्नरेट कार्यालय में सभी थाना प्रभारियों की बैठक लेकर नए ग्रेडिंग सिस्टम की विस्तृत प्रस्तुति दी। पीपीटी के जरिए मूल्यांकन के मापदंड, अंक प्रणाली और माइनस मार्किंग का पूरा मॉडल समझाया गया। इस व्यवस्था का ट्रायल इसी महीने शुरू होने की संभावना है।











