मंदसौर / कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती अदिती गर्ग ने जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। फसल कटाई के दौरान नरवाई में आग लगाने से कृषि एवं पर्यावरण को गंभीर हानि पहुँच सकती है तथा आगजनी और जनहानि की संभावना भी बढ़ जाती है।

जिला मन्दसौर में अधिकांश गेंहू की फसल कटाई कंबाईन हॉर्वेस्टर सिस्टम द्वारा की जा रही है। राष्ट्रीय फसल अवशेष प्रबंधन नीति 2014 के अंतर्गत अवशेष प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु जिला स्तरीय प्रबंध बनाये गए हैं।

मुख्य निर्देश एवं आदेश

फसल कटाई में कंबाईन हॉर्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मेनेजमेंट सिस्टम का उपयोग अनिवार्य होगा। कृषक जो नरवाई से भूसा प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए स्ट्रॉ रिपर का उपयोग किया जा सकता है। फसल कटाई के बाद नरवाई को खेत में ही मल्वर या रोट वेटर से नष्ट किया जाए ताकि वह जैविक कार्बन के रूप में मिट्टी में परिवर्तित हो सके। रिपर एवं रिपर-कंबाईन्डर का उपयोग खेत की सतह को साफ रखने और नरवाई प्रबंधन को आसान बनाने के लिए प्राथमिकता दी जाए। खेत में नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है।

अपराध पर दंडात्मक प्रावधान

खेत में नरवाई जलाने की घटना होने पर कृषकों के लिए दंड निर्धारित किया गया है। जिन कृषकों की भूमि दो एकड़ से कम है, उन पर प्रत्येक घटना के लिए ₹2,500 का अर्थदंड लगाया जाएगा। जिनकी भूमि दो से पांच एकड़ के बीच है, उन पर प्रति घटना ₹5,000 का जुर्माना होगा। वहीं, पाँच एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों के लिए प्रति घटना ₹15,000 का अर्थदंड निर्धारित किया गया है।

यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत पारित किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।

किसी भी व्यक्ति को इस आदेश से आपत्ति होने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (5) के तहत अपना पक्ष या आवेदन कृषि विभाग मन्दसौर में प्रस्तुत करने का अधिकार है।