उज्जैन/तराना / कोरोना महामारी जैसे अभूतपूर्व संकट के दौर में जहां पूरा देश भय और अनिश्चितता से जूझ रहा था, वहीं तराना क्षेत्र में महेश परमार के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनसेवा में जुटे हुए थे। जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाने का कार्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया जा रहा था। इसी बीच एक विवादित घटनाक्रम सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर कांग्रेस के लगभग 70 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269 और 270 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर दिए गए। इन धाराओं का उपयोग आमतौर पर महामारी के दौरान सरकारी निर्देशों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में किया जाता है, लेकिन कांग्रेस पक्ष का दावा है कि ये एफआईआर पूरी तरह से द्वेषपूर्ण और निराधार थीं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पुलिस द्वारा बिना पूर्व सूचना दिए ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप सभी संबंधित कार्यकर्ताओं को फरार घोषित कर दिया गया।

इस कार्रवाई से कार्यकर्ताओं में असमंजस और चिंता का माहौल बन गया। इसके बाद सभी कांग्रेस कार्यकर्ता जमानत के लिए माननीय न्यायालय में उपस्थित हुए। इस महत्वपूर्ण समय में उनका मनोबल बढ़ाने के लिए स्वयं विधायक महेश परमार न्यायालय पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और विश्वास जगाया। मीडिया से बातचीत करते हुए महेश परमार ने कहा कि, “कोरोना की विकट परिस्थितियों में जहां हमारे कार्यकर्ता मानव सेवा का पुनीत कार्य कर रहे थे, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने द्वेष भावना से प्रेरित होकर झूठे प्रकरण दर्ज करवाए। हम माननीय न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और आज सभी साथी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुए हैं। उन्होंने आगे कहा, हम कांग्रेस के सच्चे कार्यकर्ता हैं। इस तरह के प्रकरण हमारे सेवा भाव को कमजोर नहीं कर सकते। हम पहले भी जनता की सेवा में अग्रसर थे, आज भी हैं और भविष्य में भी हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़े रहेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता न्यायालय परिसर में उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुटता का परिचय देते हुए अपने साथियों का समर्थन किया। दरअसल यह घटनाक्रम न केवल राजनीतिक विवाद को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संकट के समय जनसेवा और राजनीति किस प्रकार आमने-सामने खड़ी हो जाती हैं।
तराना से सैय्यद नियामत अली की रिपोर्ट।
